🔮 Kundali & Horoscope Insights

Kundali reading insights, house analysis, and horoscope wisdom

📝 78 posts 📅 Dec 18, 2021 — Dec 28, 2019 🏷️ Vedic Astrology
Bettings. Telling about face from horoscope
One more betting. That is always correct. Applied on many horoscopes..
मुझे यह कह कर कुंडली देखने के लिये ना बोले के मैं पेज को सालों से फ़ॉलो कर रहा हूँ, पेज को फ़ॉलो अपनेमतलब के लिए मेरे दुश्मन और मुझसे जलने वाले भी कर रहे हैं, अगर आपने निरंतर post को लाइक comment share किया तो ही 🙏
Another kundli seen with betting
One more kundli seen and name predicted..
Betting will help us to check any horoscope. Like in this example the horoscope of wife was more dominant.
Gochar predictions and how to look for answers from prashn kundli??? Yaha sabhi #astrologer hain Kya koi bta sakta hai ke kaunse yog dekhke maine yeh baate kahi.. comment kare...👇👇👇
Kundli vishleshan
Ek aur kundli dekhi gai
प्रभु जी कुंडली उसकी ही देखी जाती है जो काफी समय से पोस्ट को like करता हो। हम पैसे के नही प्यार के भूखे हैं।
Ek और kundli dekhi gai aur upay bataye gae
Ek aur kundli dekhi gai aur upay bataye gae
एक और kundli charcha
Kundli dekhi gai एक aur
आज एक और बहन की कुंडली देखी और उपाय बताये
शंकर कहूँ या शिव कहूँ क्या फर्क़ पड़ता है, मुर्ख इंसान भावों को समझ क्यूँ शब्दों पीछे लड़ता है। ✍GRS
Aaj yeh kundli dekhi gai. Inko health issues hain. Inko kaafi upay बताय gae. Aap bhi kuch bta sakte hai.. agr apke zehan me kuch hai
Ej yeh bhi kundli dekhi gai... इन्हें बहुत सारे उपाय के साथ एक बेहतरीन उपाय बताया गया जो आप लोगों से साँझा करता हूँ। इन्हें शिव मंदिर की सफाई के बारे मे कहा गया। पूजा नहीं सफाई जब मंदिर close होने वाला हो सभी पूजा कर के चले गये हों तो यह शिवलिंग की सफाई करे और हर चीज़ organise करे। जय शंकर 🙏
Teesri kundli dekgi gai
Dusri kundli pr vichaar...
जो लोग काफी देर से पोस्ट्स like कर रहें है केवल उनकी ही कुंडली देखना चाहता हूँ। नाम DOB, TOB,POB परेशानी नीचे लिखे🙏
ज्योतिष एक आईना है जीवन जीने का माईना है, ना बदल पाओगे तक़दीर ना तस्वीर चाहे करना 100 बार कुंडली का मुआईना है। ✍GRS
दूसरों के गृह ठीक कर दोगे क्यूँ इतना तुम्हें अहंकार है, ज़रा अपनी कुंडली तो देख लो खाने पड़े सब बीमार हैं।
कुंडली के हिसाब से किसी की जिंदगी ना आंका करो, ज़रा सा उसकी नीयत तबीयत और कर्मों को भी झांका करो। ✍GRS
किस्मत बदलनी है तो कुंडली नहीं आसमाँ के सितारों को देखा कर जरूर, हिम्मत मुट्ठी में positivity दिल में और negativity रखा कर दूर RS
एक समय पर जन्म लेने वाले जातकों की कुंडली तो एक सी हो सकती है परंतु उनका भाग्य नही क्यूंकि याद रहे हमारे माता पिता भाई बंधु की कुंडली का असर भी हमारी कुंडली पर पड़ता है। ✍Er. Rohit Sharma
जो खुशी उस ईश्वर ने दी उसको दोगुनी कर दो, अपनी कुंडली का अच्छा ग्रह और उसने क्या दिया नीचे कॉमेंट में भर दो 👇👇👇
ज्योतिष एक अनुमान है, पर भारत की शान है, लोग यहाँ पर मेहनत से अधिक किस्मत पर पलते है, खुशी खुद की कम पर दूसरों की तरक्की से खुब जलते है, मंदिर अनेको फिर भी बना हर इंसान एक शैतान है, ज्योतिष एक अनुमान है पर भारत की शान है। लूटा यहाँ पर हर किसी ने अपना बनकर, रास्ते में बिछाये अनेको कंकर, जीता हूँ में देख के वो शंकर, ज़हर पी गया कितना महान है, ज्योतिष एक अनुमान है, पर भारत की शान है। अमीर बात ताजमहल बनाने की करते है, गरीब बेचारे फुटपाथ पर मरते है, राणा प्रताप शिवाजी को भूल गये, हीरो इनका शाहरुख सलमान है, ज्योतिष एक अनुमान है, पर भारत की शान है। बच्चों से भारी स्कूल बैग होते जा रहे है, शख्सियतें बड़ी और रिश्ते छोटे होते जा रहे है, विदेशों से प्रभावित और अपनी संस्कृति खोते जा रहे है, 100 में से 99 बेईमान है ज्योतिष एक अनुमान है, पर भारत की शान है। ज्योतिषी दूसरों को कहते हैं हर मुश्किल का हल है, पर खुद इनको ना पता क्या होना इनके साथ अगले पल है, बस अब दुख और नही yes I can change छल है, ना जाने क्यूँ भगवान बन बैठा इंसान है, ज्योतिष एक अनुमान है, पर भारत की शान है। दुध दही घी खालिस का ना कहीं नाम है, नूडल्स बर्गर मोमोस हर गली मिलते आम है, खुशी और ग़म में बस छलकते जाम है, फिर भी हर किसी की जुबां पर राम है, ज्योतिष एक अनुमान है, पर भारत की शान है। ✍Er. Rohit Sharma
खुद मियाँ फ़ज़ीहत लोगों को नसीहत: धर्म परिवर्तन से दूसरों का सूरज मंदा बताता है। खुद अपने धर्म की बात वहम पाखंड कुंडली को ना मान के मज़ाक़ उड़ाता है, क्या अब इसका सूरज मंदा ना कहलाता है।
लड़ाई मुल्ल दी लैनी; गल्ल मूँह ते कहनी; अक्सर कम्म सूरज छे वाले दा, नानके भावे तरक़्क़ी कर लैन पर कम नही सेट हुँदा एहदे साले दा। ✍️Er. Rohit Sharma
कुंडली में कोई भी गृह किसी भी खाने में बैठा ख़राब नही होता जब तक अपने कर्मों से ख़राब ना किया जाये।
N1 [रोगा] - उत्तर के इस पहले दरवाजे को N1 या रोगा के नाम से जाना जाता है। ऐसे घरों में रहने वाले लोगों को दूसरे लोगों के बुरे इरादों से नुकसान होता है। यह निवासियों के मन में अनावश्यक भय पैदा करता है। यह लोगों (विशेषकर महिलाओं) को घर से बाहर रखता है और विदेशी दौरों के अवसर भी प्रदान करता है। N2 [नागा] - इससे शत्रुओं की संख्या में वृद्धि होती है और उनसे लगातार भय बना रहता है। यह लोगों का पीछा करने की प्रवृत्ति पैदा करता है। नागा प्रवेश द्वार भी निवासियों में यह भावना पैदा करता है कि दूसरे उनसे ईर्ष्या करते हैं। N3 [मुख्य] - यह अविश्वसनीय रूप से शुभ और लाभप्रद प्रवेश द्वार है जो अपने निवासियों के लिए प्रचुर मात्रा में धन, समृद्धि और अद्भुत वृद्धि लाता है। ऐसे घर में रहने वालों को अधिक संतान की प्राप्ति होती है। N4 [भल्लत] - इस शुभ प्रवेश द्वार को भल्लाट के नाम से भी जाना जाता है। यह एक सकारात्मक प्रवेश द्वार है और यह विरासत में मिली संपत्ति, धन और समृद्धि की प्रचुरता सुनिश्चित करता है। यह धन के नए दरवाजे और अवसर खोलता है। N5 [सोमा] - ऐसे घरों में रहने वाले लोग अधिक धार्मिक और शांत स्वभाव के होते हैं। मुख्य द्वार के निर्माण के लिए सोमपद एक अच्छा विकल्प माना जाता है। N6 [भुजंग] - यहां रहने वाले निवासियों के व्यवहार के कारण आमतौर पर लोग इसे अस्वीकृत कर देते हैं और उनकी बात सुनने से बचते हैं। यह पद पुत्र से विरोध और कलह का कारण बनता है। N7 [अदिति] - अदिति नाम का यह पाद घर की महिलाओं के लिए विशेष रूप से हानिकारक होता है। यहां रहने वाली लड़कियां परिवार की पारंपरिक मान्यताओं को धता बताती हैं। उदाहरण के लिए, इसका परिणाम लिव-इन रिलेशनशिप और इंटर कास्ट मैरिज में होता है। N8 [दिति] - यह एक सकारात्मक प्रवेश है क्योंकि यह एक उच्च बैंक बैलेंस देता है और बचत बढ़ाता है। हालाँकि, N3, N4 और N5 उत्तर दिशा में सबसे अनुकूल प्रवेश द्वार हैं।
तोते की तरह रटी रटाई क्यूँ बैटिंग बोलते जाते हो, अर्रे मेरे ज्योतिष भाई किसी की डिटेल में कुंडली भी देख लो क्यूँ हराम का तुम खाते हो।
कोई भी 200 रुपया ले के तुम्हारी कुंडली देख लेगा, पर याद रखना मेरे जैसा कोई ही होगा जो लगा रेख में मेख देगा। ✍️Er. Rohit Sharma
हमारे पेज में Radhey krishna जी नाम से एक ज्ञानी जन है, आप चाहे तो उनकी फ़ीस पूछकर उनसे भी कुंडली दिखवा सकते है। मैंने अभी अभी उनके कुछ msg देखे तभी कहा।🙏
मैं शेर हूँ हाँ सच में शेर हूँ। अपना खाता हूँ, मेहनत का कमाता हूँ, किसी की ग़लत कुंडली देख और उपाय करवा झूठी बोटियाँ नहीं उठाता हूँ। ✍️Er. Rohit Sharma
लगभग सभी के घरों में इतना दूध तो होता है कि 5-6 मेहमान आ जाएं तो चाय बन जाए, किंतु यदि अचानक से 50-60 मेहमान आ जाए तो इतना दूध तो कोई नहीं रखता। तब क्या आप यह बोलेंगे कि घर गरीब है, दूध की व्यवस्था भी नहीं रखता, इसका प्रबंधन फेल है। यही हाल अस्पताल, ऑक्सीजन और दवाओं का है । सब पर्याप्त मात्रा में थी, लेकिन अचानक अपेक्षा से कई गुना ज्यादा लोग गंभीर हो गए । बड़ी बात यह है कि चिकित्साकर्मियों, सरकार, ब्यूरोक्रेट्स, जन-प्रतिनिधियों ने 3-4 दिनों में स्थितियों को नियंत्रित कर लिया है । जिन्हें लगता है कोई कुछ नहीं कर रहा, वो सिर्फ 24 घण्टे उनके साथ रहकर देखें, जो सेवा में सतत् लगे हैं । स्मरण रहे, यह परिस्थिति बिल्कुल अलग है, वायरस नियमित म्यूटेंट हो रहा है । कारण भी हम सभी स्वयं हैं । जब यह इतना प्रभावी नहीं था तब घूम घूम कर धूम मचा रहे थे अब बचाओ बचाओ चिल्ला रहे हैं क्यों ?? कब क्या होगा, इसका अंदाजा विश्वभर के वैज्ञानिक भी नहीं लगा पा रहे हैं । नागरिकों की जान बचाने के लिए केंद्र हो या राज्य सरकारें परिस्थितियों के अनुरूप सबसे अच्छा निर्णय ले रही हैं । व्यवस्था पर उंगली उठाने से बेहतर है, उसे ठीक करने में जो हमारी अपेक्षित भूमिका है, उनका निर्वहन करें । सकारात्मक रहें । सुरक्षित रहें । स्वस्थ रहें । 🙏🏻🙏🏻 💐💐
💞💞🌿🌿🌿🌸🌸 *प्रथम महीना चैत से गिन* *राम जनम का जिसमें दिन।।* *द्वितीय माह आया वैशाख।* *वैसाखी पंचनद की साख।।* *ज्येष्ठ मास को जान तीसरा।* *अब तो जाड़ा सबको बिसरा।।* *चौथा मास आया आषाढ़।* *नदियों में आती है बाढ़।।* *पांचवें सावन घेरे बदरी।* *झूला झूलो गाओ कजरी।।* *भादौ मास को जानो छठा।* *कृष्ण जन्म की सुन्दर छटा।।* *मास सातवां लगा कुंआर।* *दुर्गा पूजा की आई बहार।।* *कार्तिक मास आठवां आए।* *दीवाली के दीप जलाए।।* *नवां महीना आया अगहन।* *सीता बनीं राम की दुल्हन।।* *पूस मास है क्रम में दस।* *पीओ सब गन्ने का रस।।* *ग्यारहवां मास माघ को गाओ।* *समरसता का भाव जगाओ।।* *मास बारहवां फाल्गुन आया।* *साथ में होली के रंग लाया।।* *बारह मास हुए अब पूरे।* *छोड़ो न कोई काम अधूरे।।* *हिन्दू नववर्ष की अग्रिम शुभकामनायें...👍🌹👨‍🎨🙏💐🙋‍♂️🍁*🚩🚩🚩🚩🚩
Vaastu Tip: Living Room कुंडली का 5th house होता है, यह पर लाल रंग का art work / painting लगाने से family members के बीच में attachment बड़ती है। ✍️Er. Rohit Sharma
किस राशि के लिए कौन सा पेड़-पौधा मेष और वृश्चिक- अनार का पेड़ लगाएं। वृषभ और तुला राशि- नारियल, आम और पपीते के पेड़ लगाएं। कर्क राशि- शरीफा, रसभरी या खिरनी के पेड़-पौधे लगाएं। सिंह राशि- बेल का वृक्ष लगाएं। कन्या और मिथुन राशि- संतरा, नींबू और मौसंबी के पेड़ लगाएं। धनु या मीन राशि- केले या बरगद का पेड़ लगाएं। मकर या कुंभ राशि- पीपल, चूकी या नीम का पेड़, काले अंगूर की बेल लगाएं।
जब पंडित जी ने हर ग्रह के हर खाने में शुभ फल भी बतायें हैं, फिर ना जाने क्यू लोग अपनी कुंडली देख कर घबरायें हैं। ✍️Er. Rohit Sharma
ज्योतिष में नवमांश ज़रूर देखना चाहिये, एक राशी में 9 नवमांश और पुरी कुंडली में 12*9 108 होते है। और 108 का रहस्या आप जानते ही है प्रभु जी। ✍️Er. Rohit Sharma
धर्मी कुंडली तब तक ही चलती है जब तक इंसान धर्मी रहता है, इंसान के धर्महीन होते ही धर्मी कुंडली भी कर्मी कुंडली बन जाती है। ✍️Er. Rohit Sharma
कुंडली के सारे ग्रह शिव के हाथ में है, उसको कैसा डर #SHIV जिसके साथ में है। बोलो जय #शंकर
Group गिदड़ा दे कदे ना चलदे भावे ईकठ 5/6 हज़ार कर लो, इक्कों page शेर दा भावे लख़ा दा शिकार कर लो। रब राखा 😆🙏
*"कर्म और कर्मफल"* राजा पृथु एक दिन सुबह-सुबह घोड़ों के तबेले में जा पहुँचे। तभी वहाँ एक साधु भिक्षा मांगने आ पहँचा। सुबह-सुबह साधु को भिक्षा मांगते देख पृथु क्रोध से भर उठे। उन्होंने साधु की निंदा करते हुये, बिना विचारे तबेले से घोड़े की लीद उठाई और उसके पात्र में डाल दी। साधु भी शांत स्वभाव का था, सो भिक्षा ले वहाँ से चला गया और वह लीद कुटिया के बाहर एक कोने में डाल दी। कुछ समय उपरान्त राजा पृथु शिकार के लिये गये। पृथु ने जंगल में देखा कि, एक कुटिया के बाहर घोड़े की लीद का बड़ा सा ढेर लगा हुआ है। उन्होंने देखा कि, यहाँ तो न कोई तबेला है और न ही दूर-दूर तक कोई घोड़े दिखाई दे रहे हैं। वह आश्चर्यचकित हो कुटिया में गये और साधु से बोले, *"महाराज ! आप हमें एक बात बताइये, यहाँ कोई घोड़ा भी नहीं, न ही तबेला है, तो यह इतनी सारी घोड़े की लीद कहा से आई ?"* साधु ने कहा, *" राजन् ! यह लीद मुझे एक राजा ने भिक्षा में दी है। अब समय आने पर यह लीद उसी को खानी पड़ेगी।"* यह सुन राजा पृथु को पूरी घटना याद आ गई। वे साधु के पैरों में गिर क्षमा मांगने लगे। उन्होंने साधु से प्रश्न किया, *हमने तो थोड़ी-सी लीद दी थी, पर यह तो बहुत अधिक हो गई ?* साधु ने कहा, *हम किसी को जो भी देते हैं, वह दिन-प्रतिदिन प्रफुल्लित होता जाता है और समय आने पर हमारे पास लौटकर आ जाता है, यह उसी का परिणाम है।* यह सुनकर पृथु की आँखों में अश्रु भर आये। वे साधु से विनती कर बोले, *"महाराज ! मुझे क्षमा कर दीजिये। मैं आइन्दा ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा। कृपया कोई ऐसा उपाय बता दीजिये, जिससे मैं अपने दुष्ट कर्मों का प्रायश्चित कर सकूँ।"* राजा की ऐसी दु:खमयी हालत देखकर साधु बोला, *"राजन् ! एक उपाय है। आपको कोई ऐसा कार्य करना है, जो देखने में तो गलत हो, पर वास्तव में गलत न हो।* जब लोग आपको गलत देखेंगे, तो आपकी निंदा करेंगे। जितने ज्यादा लोग आपकी निंदा करेंगे, आपका पाप उतना हल्का होता जायेगा। *आपका अपराध निंदा करने वालों के हिस्से में आ जायेगा।* यह सुनकर राजा पृथु ने महल में आकर काफी सोच-विचार किया और अगले दिन सुबह से शराब की बोतल लेकर चौराहे पर बैठ गये। सुबह-सुबह राजा को इस हाल में देखकर सब लोग आपस में राजा की निंदा करने लगे कि, कैसा राजा है ? कितना निंदनीय कृत्य कर रहा है, क्या यह शोभनीय है ? आदि-आदि ! निंदा की परवाह किये बिना राजा पूरे दिन शराबियों की तरह अभिनय करते रहे। इस पूरे कृत्य के पश्चात जब राजा पृथु पुनः साधु के पास पहुँचे, तो लीद के ढेर के स्थान पर एक मुट्ठी लीद देख आश्चर्य से बोले, *"महाराज ! यह कैसे हुआ ? इतना बड़ा ढेर कहाँ गायब हो गया ?"* साधू ने कहा, *"यह आपकी अनुचित निंदा के कारण हुआ है राजन् ! जिन-जिन लोगों ने आपकी अनुचित निंदा की है,, आपका पाप उन सबमें बराबर-बराबर बंट गया है।* फिर राजा बोले, *" महाराज, फिर ये मुट्ठी भर बचा क्यूँ?? ये क्यूँ नहीं बंटा??"* तो फिर ऋषि बोले, *"राजन, ये तुम्हारा कर्म है। जितना तुमने मेरे भिक्षा पात्र मे मेरे खाने के लिए दिए थे उतना तो तुम्हें खाना ही पड़ेगा। "* कोई कितना भी उपाय, दान, पुण्य करले उसका कर्म दोष कट तो जाएगा पर उसका मूल नष्ट नहीं होगा... उतना तो भरना ही पड़ेगा.. जब हम किसी की बेवजह निंदा करते हैं, तो हमें उसके पाप का बोझ भी उठाना पड़ता है। तथा हमें अपने किये गये कर्मों का फल तो भुगतना ही पड़ता है। अब चाहे हँसकर भुगतें या रोकर। *हम जैसा देंगे, वैसा ही लौटकर वापिस आयेगा।* *🙏🌹जय श्री हरि🌹🙏*
🙏🏻🌻 केवल भावना को, अपने विचार को पक्का करना है। सत्संग में जैसा भाव रहता है वैसा बाद में नहीं रहता, इस धारणा को हम सब को हटा देनी है। मन में कच्चाई नहीं लानी है। पक्के रहना हमारा काम है और सहायता भगवान से मांगनी है। 🙏🏻🌻 हम सब भगवान रूपी कल्पवृक्ष के नीचे हैं। अतः अगर दृढ़ रहेंगे कि सत्संग की बातें हमारे जीवन में स्थाई हो जाए तो वे जरूर हो जाएगी, इसमें कुछ भी संदेह नहीं है। 🙏🏻🌻 इस बात पर पक्के रहे कि सत्संग करते हैं, गीता जी पढ़ते हैं, गंगाजल लेते हैं, नाम जप करते हैं इन सब की विलक्षण महिमा है। अतः अब हमारा जरूर उध्दार होगा। पुनर्जन्म वापस नहीं होगा तो फिर वह वास्तव में नहीं होगा, यह पक्की बात है। 🙏🏻🌻 अगर हम महापुरुषों की बात पर विश्वास ना करके अपने कल्याण में संदेह करेंगे तथा वापस जन्म का निमंत्रण देंगे तो फिर आना ही पड़ेगा। 🙏🏻🌻 यह तन कर फल विषय न भाई मनुष्य योनि, भोग योनि नहीं है।अगर हमने इस विलक्षण कृपामयी मानव शरीर को केवल भोगों में सुख लेने में ही लगा दिया तो हमें वापस भोग योनी यानी कुत्ता, गधा, वृक्ष आदि योनि मिलेगी अतः सावधान होना अत्यंत आवश्यक है नहीं तो भयंकर दु:ख पाना पड़ेगा। 🙏🏻🌻 जान जान कर पाप, अत्याचार एवं शास्त्र विरुद्ध कर्म करने से प्रकृति कुपित होती है, भगवान स्वयं नाराज होते हैं। भयंकर बीमारियां एवं अन्य प्रकोप धरा धाम पर होने लगते हैं अतः समय रहते भगवान के भजन में लग जाना चाहिए। ◆ प्रत्यक्ष बात है संसार का चिंतन करने से आफत एवं भगवान की तरफ चलने से ही आनंद है। अतः भगवान को अपना मान कर उनके नाम जप में, सत्संग में, गीता जी में अपने सारे समय को लगा देना चाहिए। विलक्षण अवसर हम सबको मिला हुआ है। 🙏🏻नारायण नारायण🙏🏻
नमक और चीनी का रंग एक सा होता है पर तासीर बदल जाती है, ज़रा से योग द्रिश्टी स्वभाव से ग्रहो के फलादेश की तस्वीर बदल जाति है। ✍️रोहित शर्मा🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Fill in the blank-👇👇👇 ____ 7 में हो तो पत्नी की टांग पे तिल होने की सम्भावना होती है। 👇👇👇
एक व्यक्ति प्यास से बेचैन भटक रहा था. उसे गंगाजी दिखाई पड़ी. पानी पीने के लिए नदी की ओर तेजी से भागा लेकिन नदी तट पर पहुंचने से पहले ही बेहोश होकर गिर गया। थोड़ी देर बाद वहां एक संन्यासी पहुंचे. उन्होंने उसके मुंह पर पानी का छींटा मारा तो वह होश में आया. व्यक्ति ने उनके चरण छू लिए और अपने प्राण बचाने के लिए धन्यवाद करने लगा। संन्यासी ने कहा- बचाने वाला तो भगवान है. मुझमें इतना सामर्थ्य कहां है ? मैं तो सिर्फ बचाने का माध्यम बन गया। इसके बाद संन्यासी चलने को हुए तो व्यक्ति ने कहा कि मैं भी आपके साथ चलूंगा. संन्यासी ने कहा मुझे तो खुद पता ही नहीं कि कहां जा रहा हूं। संन्यासी ने समझाया कि उसकी कोई मंजिल नहीं है लेकिन वह अड़ा रहा और साथ चल पड़ा। कुछ समय बाद व्यक्ति ने कहा- मन तो कहता है कि आपके साथ ही चलता रहूं लेकिन कुछ ज़िम्मेदारी है, आपकी ही तरह भक्तिभाव और तप की इच्छा है पर विवश हूं। संन्यासी के पूछने पर उसने अपने गले का टंटा बताना शुरू किया. घर में कोई स्त्री और बच्चा नहीं है. एक पैतृक मकान है उसमें पानी का कूप लगा है। छोटा बागीचा भी है. घर से जाता हूं तो वह सूखने लगता है. पौधों का जीवन कैसे नष्ट करूं. बैल भूखे रहते हैं. बेजुबान जानवर है उसे कष्ट दूं। बहुत से संगी-साथी हैं जो मेरे नहीं होने से उदास होते हैं। दादा-परदादा ने कुछ लेन-देन कर रखा था. उसकी वसूली भी देखनी है. बाहर जाता हूं तो मन उधर खिंचा रहता है. अपने नगर में समय आनंदमय बीत जाता है. लेकिन मैं आपकी तरह संन्यासी बनना चाहता हूं. राह दिखाएं। संन्यासी मुस्कराने लगे - जो तुम कर रहे हो वह जरूरी है. तुम संन्यास की बात मत सोचो. अपना काम करते रहो। चलते-चलते उसका नगर आ गया. उसे घर को देखने की इच्छा हुई. उसने संन्यासी से बड़ी विनती की- महाराज मेरे घर चलें. कम से कम 15 दिन हम घर पर रूकते हैं. सब निपटाकर फिर मैं आपके साथ निकल जाउंगा। उसकी जिद पर संन्यासी रूक गए और उसे बारीकी से देखने लगे। सोलहवें दिन अपना सामान समेटा और निकलने के लिए तैयार हो गए. व्यक्ति ने कहा-महाराज अभी थोड़ा काम रहता है. पेड़-पौधों का इंतजाम कर दूं. बस कुछ दिन और रूक जाएं निपटाकर चलता हूं। संन्यासी ने कहा- तुम हृदय से अच्छे हो लेकिन मेरे साथ चलने से तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता. उसने कहा- कोई है ही नहीं तो फिर किसके लिए लोभ-मोह करूं। संन्यासी बोले- समाज को परिवार समझ लो, उसकी सेवा को भक्ति. ईश्वर को प्रतिदिन सब कुछ अर्पित कर देना. तुम्हारा कल्याण हो इसी में हो जाएगा. वह व्यक्ति उनको कुछ दूर तक छोड़ने आया. विदा होते-होते उसने कहा कि कोई एक उपदेश तो दे दीजिए जो मेरा जीवन बदल दे। संन्यासी बोले- सत्य का साथ देना, धन का मोह न करना. कुछ साल बाद वह संन्यासी फिर वहां आए. उस व्यक्ति की काफी प्रसिद्धि हो चुकी थी. सभी उसे पक्का और सच्चा मानते थे. लोग उससे परामर्श लेते. छोटे-मोटे विवाद में वह फैसला देता तो सब मानते. उसका चेहरा बताता था कि संतुष्ट और प्रसन्न है। संन्यासी कई दिन तक वहां ठहरे. फिर एक दिन अचानक तैयार हो गए चलने को। उस व्यक्ति ने कहा- आप इतनी जल्दी क्यों जाने लगे. आपने तो पूछा भी नहीं कि मैं आपके उपदेश के अनुसार आचरण कर रहा हूं कि नहीं। संन्यासी ने कहा- मैंने तुम्हें कोई उपदेश दिया ही कहां था ? पिछली बार मैंने देखा कि तुम्हारे अंदर निर्जीवों तक के लिए दया है लेकिन धन का मोह बाधा कर रहा था. वह मोह तुम्हें असत्य की ओर ले जाता था हालांकि तुम्हें ग्लानि भी होती थी। तुम्हारा हृदय तो सन्यास के लिए ऊर्वर था. बीज पहले से ही पड़े थे, मैंने तो बस बीजों में लग रही घुन के बारे में बता दिया. तुमने घुन हटा दी और फिर चमत्कार हो गया. संन्यास संसार को छोड़कर ही नहीं प्राप्त होता. अवगुणों का त्याग भी संन्यास है। हम सब में उस व्यक्ति की तरह सदगुण हैं. जरूरत है उन्हें निखारने की. निखारने वाले की. अपने काम करने के तरीके में थोड़ा बदलाव करके आप चमत्कार कर सकते हैं। एक बदलाव आजमाइए- हर किसी से प्रेम से बोलें. उनसे ज्यादा मीठा बोलेंगे जिन पर आपका शासन है. आपमें जो मधुरता आ जाएगी वह जीवन बदल देगी कम से कम इसे आजमाकर देखिए। जय बाबा विश्वनाथ ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव जय काशी कोतवाल काल भैरव 🔱❤️⏳